अग्रजा.......'s image
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समय जो महसूस किया तब
सोचो  तो 
रूह कांप जाती है अब

दृदशक्ती ही तुम्हारी
बन गई थी ताक़त तुम्हारी
उससे मिलता था हौसला हमें भी 
वरना डर ने तो डरा ही दिया था हमें भी

एक एक दुआ में मांगी थी
सबने दुआएं हजार
कि बस तुम आ जाओे 
इस संकट से बाहर

हुआ खुदा भी रहनुमा
हुआ दुआओ की सबका यूं असर 
कि तुम आ गई उस अज़ाब से बाहर ,इस तरह
जैसे
बादलों में से ,खिल ही जाती है धूप, जिस तरह
अंधेरों को चीरकर, निकल ही आती है रोशनी, जिस तरह
बवंडर को हरा, किश्ती पा ही लेती है किनारा,  जिस तरह

आभार,  प्रभु का करें जितना भी, वो कम है
लिखें कुछ , गर अपनो के लिए
तो अक्षर भी कम है
क्योंकि जज़बात रखे सबने 
उस मुश्किल घड़ी में जो
उनके लिए शब्द भी निशब्द है

घूम गया है समय का चक्र अब
थम गया है वो तूफ़ान अब
बदल गया है हवा का रूख़ अब
फासला इस कठिन राह का 
आख़िर मिट ही गया है अब

लौट आई हो अब अपने अंदाज़ में तुम
बहना मेरी
हर पल ,खुशियों से घिरी रहो तुम
दुआ है दिल से हमेशा सलामत रहो तुम








 









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