सुकून के दो पल's image
1 min read

सुकून के दो पल

sandysoilsandysoil June 16, 2020
Share0 Bookmarks 51 Reads1 Likes

जहाँ भी जाता हूँ, एक भीड़ पीछे आती है,

सुकून से दो पल ज़िंदगी ये कहाँ बिता पाती है।

जिस दिन हो जाएगी इंतहा मेरे सब्र की,

नक़ाब चेहरे पर लगा लूँगा कई,

और भीड़ में हो जाऊँगा मैं भी शामिल।


-संदीप गुप्ता SandySoil

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts