रोटी फिर जली's image
Poetry1 min read

रोटी फिर जली

sandysoilsandysoil March 14, 2022
Share0 Bookmarks 392 Reads1 Likes

रोटी जली,

रसोईये ने कहा,

तवा बदल दो।

रोटी फिर जली,

रसोईये ने कहा,

आटा बदल दो।

रोटी फिर जली,

रसोईये ने कहा,

पानी बदल दो।

रोटी फिर जली,

रसोईये ने कहा,

चूल्हा बदल दो।

रोटी फिर जली...

जलती रही...

किसी की हिम्मत न हुई,

कहने की,

रसोईया बदल दो।

~संदीप

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts