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कहासुनी #३

sandysoilsandysoil June 16, 2020
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ज़िंदगी!

माना कि तय हुआ था,

कि तू इम्तिहान लेगी।

पर ये क्या?

ना तारीख़ तय की,

ना समय,

आ गयी तू, लेने इम्तिहान।

ऊपर से प्रश्न पत्र भी ऐसा,

कि न पढ़ा हुआ काम आए,

न कमाया हुआ। 

इतना ज़ुल्म क्यों?

चाहती क्या है तू?

चालबाज़! कमबख़्त!


सुन! !

ये जो कुछ हो रहा है,

तेरे भले के लिए ही तो है।

इम्तिहान ना देना हो , मत दे,

पर ज़ुबान पर तो लगाम रख।


-संदीप गुप्ता SandySoil

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