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भार मेरा तू वहन कर

sandysoilsandysoil June 16, 2020
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तू पिए जा रहा है,

मैं जिए जा रही हूँ।

तू जितना लड़खड़एगा,

मै उतना खिलखिलाऊँगी,

तू गिर पड़ेगा धुत कहीं,

मैं फ़र्राटा दौड़ लगाऊँगी,

ओ प्रिय नशेड़ी!

ख़ूब पी,

प्रतिदिन पी,

गिर, पड़,

झड़ जा।

अर्थव्यवस्था मैं देश की,

टिकी हूँ तुझ पर,

वहन कर! 

भार मेरा तू वहन कर!

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