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गुलाब उन दिनों का

Sandeep RajputSandeep Rajput October 4, 2021
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90" के दशक का

एक मुरझाया हुआ गुलाब

आज भी मेहकता है


और जब भी बिच किताब से

निकाला जाता हैं

तब मेहकती हैं यादे उस ज़माने

और सुनाई देते हैं नग्मे

किशोर दा और लता जी के


और खिल जाते हैं

सब फूल दिलो के

छिड़ जाते हैं तार यादो के

कुछ खट्टी तो कुछ मीठी यादो के



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