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भारतीय - एक ही पहचान

सम्रिता®सम्रिता® August 16, 2022
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टूट चुका टूटना था जितना,

अब और ना बिखर ने देंगे।

ये धरती हमारी माता है,

इसे और ना छलनी होने देंगे।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक,

सब एक हैंएक रहेंगे।

ये सिर्फ रेखाएँ नहीं कागज़ पे,

तस्वीर है भारत माता की।

ये पूजनीय नक्षा नहीं बदलने देंगे।

कोना-कोना इस देश का,

हर नागरिक इस देश का,

पेहचान सब की एक होगी।

ना धर्म से, ना जाति से,

ना राज्य की सीमाओं से कोई जाने जाएंगे।

केवल भारतीय सब कहलाएंगे।

मुफ्त में नहीं मिली थी स्वतंत्रता हमें।

कई दीवानों ने मोल चुकाया था,

अपने प्राणों से।

उन शहीदों का कर्ज़ चुकाएंगे।

इस देश की अखंडता बनाए रखेंगे।

सच्चे भारतीय तभी कहलाएंगे।

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