ठंड और बचपन's image
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ये सर्द रात दिसंबर की,

साथ बरसात ये सावन की,

मन कर रहा फिर बच्चा बन,

तकियों का घेरा कर,

चादर को ओढ़कर,

उस में खुद को समाकर,

पकोड़े हो हाथ में,

गरमा गरम मॅगी भी साथ में,

सब चिंता भूल जाऊ,

"बचपन-झुले" में झूल जाऊ,

ठंड में कांपते हुए,

अलाव सेकते हुए,

फिर सपनों में खों जाऊ,

उसी तकियों के घेरे में,

बच्चा बन सो जाऊ।


     - समीर



Cozy winter nights❤️





Childhood days :)

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