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अक्सर parents अपने बच्चों को ये कहते हैं कि ये काम लड़के नहीं करते ,लड़कियों का काम ये नहीं होता,लड़के ऐसा करते हैं,लड़कियाँ वैसा करती हैं। पेरेंट्स उनके जहन में कूट कूट के ये भर देते हैं कि वो बच्चा "लड़का" है,उसे ऐसा करना है,और ये बच्ची "लड़की" है,उसे वैसा करना है।हमारी ये सोच गलत है।
अपने बच्चो में किसी भी तरह का बदलाव लाने से पहले हमें ख़ुद में बदलाव लाना होगा,हमें अपनी ये सोच बदलनी होगी कि कोई भी particular काम लड़का कर सकता है,
या फिर सिर्फ़ लड़की कर सकती है।
हमे अपने बच्चो को बताना होगा कि कोई भी लड़का एक अच्छा cook/शेफ बन सकता है,और कोई भी लड़की एक अच्छी इंजीनियर या scientist बन सकती है।
हर बच्चा अपने अंदर एक talent या हुनर के साथ पैदा होता है,और टैलेंट टैलेंट होता है,जिसका कोई gender नहीं होता,
ठीक वैसे कामयाबी का कोई जेंडर नहीं होता।कामयाबी सिर्फ़ कामयाबी है,कोई स्त्रीलिंग या पुल्लिंग नहीं।
हमे अपने बच्चो को सिखाने से पहले ये सीखना होगा कि हम उन्हें कभी कुछ भी ऐसा न सिखाये जिसका प्रभाव उनके जेहन पर उम्रभर की एक छाप छोड़ दे,जो उन्हें बताये कि लड़का और लड़की में फर्क़ है,और उनके काम में भी।
-सलमा मलिक

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