Be Practical - An Article's image
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आपने लोगो को अक्सर ये कहते सुना होगा कि
"Be Practical",
इस बात में व्यवहारिक बनने से ज़्यादा इस बात पर ज़ोर दिया जाता है, कि आप अपने भावों, अपने विचारों को एक तरफ रख दे,यानी इस दुनिया में होने वाली हर चीज़ को practically देखें न कि Emotionally। और आसान अल्फ़ाज़ में कहूँ तो आप भावशून्य हो जाये, शायद ये कुछ हद तक सही भी है जैसा ऐनी फ्रैंक ने अपनी डायरी में भी लिखा,
"To feel is the worst of all",
ये बात जानते हुए भी ऐनी कभी भी ख़ुद को भाव शून्य नहीं कर पाई और मेरा मानना है कि इंसान को ख़ुद को भाव शून्य नहीं करना चाहिए।अपने विचारों और भावों को समझिये।दुनिया समझे न समझे मगर आप ख़ुद को समझिये, ख़ुद को लिखिए।क्योंकि मुझें लगता है कि-
To feel yourself and write yourself is the best of all."
भावशून्य होना चीज़ो का हल नहीं बल्क़ि एक समस्या है जिसमें इंसान इस मुआशरे के साथ साथ ख़ुद से भी दूर होता चला जाता है, और जो ख़ुद से दूर हो,वो किसी के क़रीब क्या होगा।
आप ख़ुशक़िस्मत हैं अगर आप अपने भावों और विचारों के प्रति सज़ग हैं, और बदक़िस्मत हैं वो लोग जो समाज के साथ साथ ख़ुद के लिए भी भावशून्य हो गये हैं।
©- Salma Malik

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