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"अच्छे लगते थे तुम"

Salma MalikSalma Malik November 2, 2022
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एक कविता तुम्हारे लिए  - "अच्छे लगते थे तुम"

अच्छे लगते थे तुम जब वो सड़को की सैर पर निकलते थे,
वो सादी चप्पलें पहने हुए,
अच्छे लगते थे तुम जब तुम अपने अंदर अपना गाँव बसाकर चलते थे,(शहर में होते हुए भी)
अच्छे लगते थे तुम जब कहते थे कि मुझें ये अंग्रेज़ी वंग्रेजी अच्छे से नहीं आती,इसलिए हिन्दी लिखता हूँ,
अच्छे लगते थे तुम जब वो छोटी छोटी बातें लिखने में बड़ा वक़्त लिया करते थे,
अच्छे लगते थे तुम जब यूँ ही हमें कह दिया करते थे कि तुमसा कोई नहीं,
अच्छे लगते थे जब तुम वो काला कोट पहनकर,एक खूबसूरत सी फोटो मुझें भेजते थे,
अच्छे लगते थे तुम जब सड़कों पर यूँ ही पूरी मौज में चला करते थे,
अच्छे लगते थे तुम,तुम्हारे हर अंदाज़ में,बोलने में,चलने में,रूठने में,मनाने में,तुम्हारे प्रेम में होने में,हाँ तुम्हारे गुस्से से डर लगता था।
तुम अच्छे ही लगते रहोगे,
और जब तक मेरी कवितायों में तुम्हारा वजूद है,
चाहे मैं कितनी भी कोशिश कर लूँ तुम्हें अच्छा न मानने की,मगर मेरी कविताओं में तुम्हारा वजूद मुझें तुम्हारे होने का एहसास दिलाता रहेगा,और तुम्हारे दिए हुए ज़ख़्मो का भी।
- सलमा मलिक


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