मै समझता हूँ's image
Share0 Bookmarks 37 Reads0 Likes

जब तुम्हे रातो को नींद नहीं आती है
जब तुम्हे दिन भर में हुई कोई बात सताती है
जब सपनो में भी तुम्हे तुम्हारी गलतिया ही नज़र आती है
मै समझता हूँ

जब तुम्हारे अपनो को भी तुमपे नाज़ नहीं होता है
तुम्हारे होने न होने का उनपे कोई अहसास नहीं होता है
भीड़ में रहके भी तुम ख़ुद को अकेला पाते हो
तो मैं समझता हूँ

जब तुम्हारे दोस्तो के पास तुमसे अच्छे कपड़े होते है
तुम्हारी जरूरतों से ज़्यादा तो उनके नख़रे होते है
अपने फटे हुए जूतों को देख जो तुम नज़रे चुराते हो
तो मैं समझता हूँ

जब तुम्हारी हर हसीं के पीछे एक दर्द होता है
दिल तुम्हारा आज भी सर्द होता है
ना चाहते हुए भी तुम्हे अगर मुस्कुराना पड़े
तो मैं समझता हूँ

मै समझता हूँ तुम्हारी 
हर एक खामोशी
हर एक चुप्पी को
मै समझता हूँ तुम्हारी दिन में बार-बार आती झपकी को
मै समझता हूँ तुम्हारे अधूरे वादों को
मै समझता हूँ तुम्हारे हर नेक इरादो को
मै समझता हूँ


जब बैठते हो सालो बाद अपने कल को याद करते हुए
हस्ते हो ख़ुद को देखते 
समय बर्बाद करते हए
उस हसी के पीछे जो ग़म है
और अगर आँख तुम्हारी नम है
तो मैं समझता हूँ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts