बात अनकही's image
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जाने ये कौनसी बात है जो मुझे सता रही है
मन में तो है पर होंटो पर नहीं आरही है
कहू की नहीं कहू ये मैं सोचता हूँ
इस बात का जवाब ख़ुद ही मैं खोजता हूँ

समझ लोना इन बातो को आँखों से ही
रहने दो ना कुछ बाते अनकही ही

होगा क्या कहने के बाद उसी का डर है मुझे
कही गलती से खो न दु तुम्हे 
यही फिकर है मुझे

पर बात कहना तो ज़रूरी है
सच तुम्हारे सामने रखना, मेरी मजबूरी है

क्योंकि जताना हमे आता नही
और बताने की हिम्मत, हम जुटा पा नहीं रहे
ये जो मेरे भाव है, वह बहार आ नहीं रहे
कहते है आँखे सच्चाई बताती है, लेकिन ना देखने वालो के लिए बहुत बाते छुपाती है

अगर इतना पढ़के भी
तुम समझ पा नहीं रही
तो सही में रहने दो न
ये बात युही अनकही

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