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मौन की हुंकार हूं मैं

saikt1923saikt1923 March 1, 2022
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मौन की हुंकार हूं मैं 
धनुष की टंकार हूं 
मधुमक्खी का शहद हूं
 मैं सांप की फुंकार हूं 
मानवों का रणयुद्ध हूं 
सिंह का प्रहार हूं 
गौर से देख दुश्मन मेरे भारत मां की जय जयकार हूं
विचित्र स्वरूपों का हूं धनी विकराल मेरे बोल है 
प्रेम में न कोई कपट ईर्ष्या में न मोल तोल है 
गौर देखो मुझे मंद मंद मुस्कान हूं 
बिगड़ गई जो चाल मेरी खौलता श्मशान हूं
आकार हूं विकार हूं साकार हूं निराकार हूं
विनाश की हूं विकट लीला प्रेम की सुगंधित बयार हूं
आदि से बदल रहा अनंत तक हूं परिवर्तित 
तुम धराशायी हो गए मैं जीवित हूं होकर भी विघटित 
सनसनाती श्वास हूं दहकती पेट की आग हूं
लटपटाता सा नशा शांत आनंद का बाग हूं 
बिगड़ गई जो चाल मेरी मैं खौलता श्मशान हूं
गौर से देख दुश्मन मेरे मैं जगजाहिर हिन्दुस्तान हूं 
गौर से देख दुश्मन मेरे मैं स्थिरचित हिंदुस्तान हूं 
गौर से देख दुश्मन मेरे मैं भारत महान हूं 
मैं विकराल होता जा रहा जो रोक सको तो रोक लो 
मैं झूम रहा अपनी चाल में जो टोक सको तो टोक लो
मैं लक्ष्य अपने कार्य का परिणाम अपने कर्म का 
मैं भाव ईश्वर के स्वरूप का 
मैं रूप नमाज के मर्म का 
मैं ईसाई का ईसा हूं 
नानक का उसूल हूं 
मैं विवाह की सप्तपदी मैं निकाह का कुबूल हूं 
मैं हिमालय की सुंदरता हूं 
राजस्थान का मरुस्थल हूं
मैं बुद्ध की शांति मैं हिंद की हलचल हूं
पहचान सको तो पहचान लो मैं घोर अंधेरा ब्रह्मांड का 
मैं अयोध्या का राम हूं हनुमान सुंदरकांड का 
मैं नागाओं की नग्नता मैं मुसलमानों का हिज़ाब हूं 
मैं तेरी बदसलूकी का शातिराना जवाब हूं
मैं बिक रहा हूं प्रेम में कामसूत्र का काम हूं
मैं भगत सिंह की कल की गोली आज का कलाम हूं
बिगड़ गई जो चाल मेरी मैं खौलता श्मशान हूं 
गौर से देख दुश्मन मेरे मैं जगजाहिर ही हिंदुस्तान हूं
मैं तिरुपति का मंदिर हूं आगरा का ताज हूं
मैं कश्मीर का स्वर्ग हूं
कन्याकुमारी का नाज हूं
मैं रोम रोम में हूं बसा 
मैं भारत भारतीयों का 
न हिंदू हूं ना मुसलमान हूं
मानवता का अवतार हूं
विश्व की बिखरती प्रजातंत्र का एकमात्र मैं आकार हूं
मैं शब्द में हूं रच रहा मैं भावों में बस रहा 
प्रेम के बलबूते संसार को बांहों में कस रहा 
मैं एकता का प्रतीक हूं विविधता का संसार हूं
मैं तेरी अवसर का दांव नही अपने भाग्य की चीत्कार हूं
स्वतंत्रता की रणभेदी का जीता जागता परिणाम हूं 
मैं गांधी की अडिग चाल ब्रह्मसमाज का राजाराम हूं
मैं अपने अस्तित्व की शुरुआत हूं 
मैं वेदों की माता सनातन धर्म का तात हूं 
मैं थिरकते नृत्य का लय हूं 
मैं शिव तांडव का तेज हूं

मैं संगीतो का प्रसार हूं मुशायरे का भावावेग हूं 
मैं सात्विक भोजन साधु का मैं मांसाहारी शेर सा
मैं गाय जैसा सौम्य हूं अड़ियल खेतो के बैल सा
मैं शंख की नाद हूं ढोल की थाप हूं 
मैं मंत्र का चमत्कार हूं घुंघरू की झंकार हूं
मैं महावीर की अहिंसा हूं राम का त्याग हूं 
कृष्ण की बंशी के गीतों संग मैं परशुराम की आग हूं 
मैं प्राचीनता का सूक्ष्म चिन्ह नवीनता का मंगलयान हूं 
बिगड़ गई जो चाल मेरी मैं खौलता श्मशान हूं
चल छोड़ अब मेरी कहानी मैं जगजाहिर हिंदुस्तान हूं 
चल छोड़ अब मेरी कहानी मैं भारत महान हूं

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