स्वर कोकिला's image
Poetry1 min read

स्वर कोकिला

SahilSahil February 7, 2022
Share0 Bookmarks 69 Reads1 Likes

सुनो कोकिला, उड़ जाओ तुम

विदा गीत ना गा पायेंगे


रुंधे हुए हैं गले सुरों के,

शहनाई से आँसू टपके,

साँस ताल की उखड़ी-उखड़ी,

बोल आँख से बह जायेंगे, 

विदा गीत ना गा पायेंगे


ज़हर बुझे युग की तुम अमृत,

बुझे दीये कर देती जीवित,

अमृत भरे कलश सब फूटे, 

दीप तिमिर में खो जायेंगे,

विदा गीत ना गा पायेंगे

-साहिल

Twitter: @Saahil_77 


,


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts