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समय का पहिया

SahilSahil October 9, 2021
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समय का पहिया जो चल रहा है 

तमाम सपने कुचल रहा है 


पड़े हैं ठण्डे घरों के चूल्हे 

सुना है अब गाँव जल रहा है 


जो साँप पाला था आस्तीें में

वो आज केंचुल बदल रहा है 


रगों में नफ़रत उबल रही है 

ज़हर वो लब से उगल रहा है 


वही है क़ातिल वही है मुंसिफ़ 

वो कितने चेहरे बदल रहा है 


- साहिल

Twitter: @Saahil_77



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