कहाँ जायेंगे's image
Poetry1 min read

कहाँ जायेंगे

SahilSahil September 13, 2021
Share0 Bookmarks 43 Reads0 Likes

जड़ें अपनी ही हिलाएंगे, कहाँ जायेंगे 

पत्ते ही शाख़ को खाएंगे, कहाँ जायेंगे 


मुल्क़ बनता ही रहा है सदा बनते-बनते 

तोड़ के इसको बनाएंगे, कहाँ जायेंगे 


रहनुमा वो हैं जिन्हें इश्क़ है अंधेरों से 

हमें सूरज वो दिखाएंगे, कहाँ जायेंगे 


हमारी आँख में उम्मीद का जज़ीरा है 

अश्क़ में इसको डुबाएंगे, कहाँ जायेंगे


जो उठाते हैं सुबह-शाम उँगलियाँ सब पे

गिने ऊँगली पे ही जायेंगे, कहाँ जायेंगे 


- साहिल


Twitter: @Saahil_77

Facebook: facebook.com/SaahilVerses

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts