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इंद्रधनुष

SahilSahil December 27, 2021
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फिर से आ कर छड़ी घुमा, ओ जादूगर

इंद्रधनुष फिर वही बना, ओ जादूगर


पिछले रंग चटक थे, लेकिन कच्चे थे

उड़े, ज़रा सी चली हवा, ओ जादूगर


झाँक रही है कालिख रंगो के पीछे 

एक परत तो और चढ़ा, ओ जादूगर


अबकी सोने-चांदी से भी मढ़ देना

आँखें सबकी दे चुँधिया, ओ जादूगर


- साहिल

Twitter: @Saahil_77 

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