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वृद्धाआश्रम में बुजुर्ग

Sahdeo SinghSahdeo Singh October 23, 2021
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हमारा सामजिक परिवर्तन और बदलते सामजिक मूल्यों का परिणाम यह है की हम मानवीय संवेदनाओं से दूर होते जा रहें हैं ।

क्या हमारे रिश्ते और उनमें समर्पण और निष्ठा का भाव विलुप्त हो रहा है और हम आज अपने नैतिक मूल्यों और उत्तरदायित्व से भाग रहे हैं ।

यह एक बहुत बडी सामाजिक समस्या है, जो दिन पर दिन विकट होती जा रही है ।

जो माता पिता अपने बच्चों के लालन पालन में अपने जीवन का सब सुख भूलकर दिन रात जागकर; धूप छाँव,गर्मी से बचाकर अपने संतान को पालते हैं कि बडा होकर मेरा सहारा बनेगा, वही बच्चे अपने माता पिता को वृद्धाआश्रम में असहाय छोड़ देते हैं ।

हमारी जीवन शैली इतनी विकृत हो गयी है की जो जीवन के बीज हैं,आज अगर वो वृद्ध हैं, असहाय हैं तो उन्हें अपने जिन्दगी से दूर कर दें ।

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