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एक उम्मीद जो लगाए बैठा था जिंदगी

क्यों इतना निराश कर दिया तूने,

मेरे हर प्रयास को निष्फल कर दिया तूने,

वक्त की आड़ में छुपना नहीं गवारा मुझे,

मैने खुद ही जिंदगी लुटा दिया तुमने,

तूं इतना भी ना बेरहम बनो कि,

विश्वास का महल खंडहर बन जाए,

इन हसरतों के खंडहर तले कहीं

मेरा दम ना निकल जाए ।।

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