तपिश's image
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हवाएं हमारे शहर की प्रदूषित हो गई हैं

हर गली हर नुक्कड़ में गर्मी बढ़ गई है,

चारों दिशाओं में हाहाकार मचा है,

इंसान का इंसान से अदावत ठन गई है ।

एक खामोशी एक उलझन फिजा में भर गई,

क्योंकि मजहब की मशक्कत की गर्मी बढ़ गई है ।

चारों तरफ लू की तपिश से धरती जल रही,

हर दिशाएं अपने मुख से ज्वाला उगल रही हैं ।।

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