सामाजिक रिश्तों की तलाश's image
हिन्दी पखवाड़ाPoetry1 min read

सामाजिक रिश्तों की तलाश

Sahdeo SinghSahdeo Singh September 18, 2021
Share0 Bookmarks 27 Reads0 Likes

समाज आज एक अनजाने

मोड पर खडा है,

जहां इंसानी रिश्ते नफरत

मेँ बदलते जा रहे हैं,

जाति धर्म मजहब के नाम पर

सामाजिक ताना बाना टुट रहा है,

आखिर कहां खो गये हमारे

प्रेम, व्यवहार,सदभाव,

सामाजिक रिश्ते ?

तलशना होगा !

फिर से अपने सामाजिक रिश्तों,

की बुनियाद बनानी होगी,

जाति धर्म मजहब से उपर उठ

इंसानी रिश्तों मानवता को

स्थापित करना होगा ।।

“जो बंट गया वह मिट गया,

जो मिल गया वह खिल गया।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts