प्यासी धरती's image
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प्यासी धरती की प्यास बुझाने को

बेकरार हैं बादल,

धरती पर सैलाब लाने को बेकरार

हैं बादल,

ये प्यार है या तकरार का इजहार है

जब दोनों के अंतर्मन को करते हैं घायल,

इंसान की नफरत से प्रकृति का आक्रोश

बादल में भी हो गया अहंकार का जोश

मिटाने को आतुर जलमग्न धरती की हरियाली

धरा पर फैला है हर ओर पानी पानी

जब प्यार में नफरत का आगाज होता है

मानवता त्राहि त्राहि करती है

बस सैलाब आता है ।।

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