फासले बढ़ते गए's image
Kavishala DailyPoetry1 min read

फासले बढ़ते गए

Sahdeo SinghSahdeo Singh April 30, 2022
Share0 Bookmarks 74 Reads0 Likes

फासले यूं बढ़ते गए,

जिंदगी सिकुड़ती गई,

भावना संवेदना से दूर हो गए हम सब,

मानवता के बीच दीवार बनती गई,

अब ना कोई प्यार है ना कोई जज्बात,

दिखावा और छलावा में जिंदगी

उलझती गई,

बदल गई रिवायतें फासलों के फलसफे

गूंजती फिजाओं में,

बोलियां धर्म मजहब की,

आपसी सद्भाव की डोरियां बिखर गई,

फासले बढ़ते गए, जिंदगी सिकुड़ती गई ।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts