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पेड के सूखे पत्ते

Sahdeo SinghSahdeo Singh October 7, 2021
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पेड के पत्ते

एक दिन घर से अनमने मन से निकला,

एक पेड के नीचे बैठ ,

सोचने लगा !

धरती ने जीवन के लिये

सब कुछ हमें दिया,

अन्न, जल,पेड पौधे, फल फूल,

सब कुछ हमें प्रकृति ने दिया,

फिर भी हम इन्सान सदा अधिक

की चाह रखते है,

मैं जिस पेड के नीचे बैठा था,

बहुत से सुखे पत्ते बिखरे पडे थे,

मैने मन ही मन सोचा ये पत्ते सूख कर

नष्ट हो गये, अचानक आवाज आयी,

नहीं ! मैं बारिश में भीगकर गल जाऊंगा,

खाद बनकर धरती में मिल जाऊँगा,

फिर एक नवजीवन पाकर,

पेड बन जाऊँगा ।

अपने हरियाली से सब जीवों को,

आनन्द एवं खुशी दूंगा ।

प्रकृति में कोई चीज अर्थहीन नहीं है,

सृष्टि की हर वस्तु की उपयोगिता है,

सिर्फ नवजीवन पाकर रुप बदलता है ।।

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