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Kavishala DailyPoetry1 min read

पंख फैला उड़ जा

Sahdeo SinghSahdeo Singh April 11, 2022
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खोल ले पंख अपना कहता परिंदा

अभी उड़ान बाकी है,

जमीन नहीं है मेरे लिए,

अभी तो सारा आसमान बाकी है ।

अपने जज्बे और जुनून को कायम

रख, बेखौफ आसमान में उड़ते रह,

अगर मंजिल नहीं मिलेगी तो भी,

तेरे हौसलों का सबब काफी है ।

समंदर की खामोशी को कमजोरी

ना समझ भाई,

जितना तूफान बाहर है,

उससे ज्यादा अंदर बाकी है ।।

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