नाउम्मीद's image
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नाउम्मीद होकर जिंदगी जी भी नहीं सकते

उम्मीद की रोशनी में ही जीने की तमन्ना होती है

वैसे तो रात कितनी भी लंबी हो मगर

सूरज निकलते ही उजाले की कशिश होती है ।

सारी कायनात हमें कुदरत का करम दिखाती है

पर हम इंसानों में सबुरी कम होती है

हालात से उलझकर हम बेचैन यूं हो जाते हैं

वक्त की बाजीगरी पर भरम होती है ।

अपनी चाहत से नियति को बदल सकते नहीं

धीरज खोकर कुछ भी हासिल हो सकता नहीं

अपने कर्मों की कुल्हाड़ी से काट सकते हैं

दुर्दिन अपने,

बेचैन होकर जिंदगी संवर सकती नहीं ।।

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