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नकल करने वाले को गुलामी

सहनी पड़ती है,

मैना अपनी आवाज निकालता है

आजाद रहता है,

तोता हमारी बोली बोलता है,

इसलिए पिंजरे में कैद रहता है ।

अर्थात अपने वास्तविक रूप में

रहना ही आपकी आजादी है,

दूसरे की नकल करना गुलामी है

जो आप के स्वयं के व्यक्तित्व को

कैद कर लेती है ।।

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