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नहीं भूल सकता वो बिसरे हुए दिन,

जिसमें छलकती खुशियां हर दिन,

दोस्तों के साथ खेलते दिन भर,

नहीं कोई गम ना कोई फिकर,

मां के ममता की वो प्यारी झिड़की,

जिसमें सदा खुली रहती दुलार की खिड़की,

हर दिन बीत जाता था खुशियों भरा,

कैसे भूल सकता है वो पल भला ।

हर दिन याद आते है बीते हुए दिन,

जिसमें छलकती खुशियां हर दिन ।।

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