नदी की व्यग्रता's image
Kavishala DailyPoetry1 min read

नदी की व्यग्रता

Sahdeo SinghSahdeo Singh November 29, 2022
Share0 Bookmarks 72 Reads0 Likes

नदी की व्यग्रता सागर से मिलने की

सागर में मिलकर एकाकार हो जाने की

पानी को पानी से मिलने की बेचैनी

और अपने अस्तित्व को सागर में समाहित

करने की उत्कंठा प्यार में अस्तित्व खो

देने का समर्पण ।

यह प्रकृति का संदेश मानव जीवन के लिए ।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts