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इंसान के तीन मित्र होते हैं

एक मित्र जो चौबीस घंटे उसके साथ रहता है कभी भी अलग नहीं होता है ।

दूसरा मित्र वह होता है जो सुबह शाम मिलता है ।

तीसरा मित्र वह होता है जो कभी कभार मिलता है ।

तीनों मित्र कौन हैं: पहला मित्र ” शरीर” दूसरा मित्र: ” परिवार” तीसरा मित्र: ” कर्म”

इंसान की मृत्यु के बाद शरीर साथ छोड़ देता है, परिवार शमशान तक छोड़ वापस आ जाता है, सिर्फ कर्म ही उसके साथ जाता है ईश्वर की अदालत में ।

जहां उसके कर्मों के आधार पर ही उसे पुरस्कार या दंड मिलता है । अर्थात हमारे कर्म ही हमारे साथ रहते हैं ।।

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