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Kavishala DailyPoetry1 min read

मुझे कुछ नहीं चाहिए

Sahdeo SinghSahdeo Singh July 2, 2022
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मुझे कुछ नहीं चाहिए जमाने से

मुझे बचा के रखना इन फसानों से

जो तकरीरें लकीर खींच कर अलग कर दे

दूर ही रहना है इन सियासत दानों से,

यह मुल्क जो प्यार का गुलदस्ता था

मुस्कराते फूलों का एक जत्था था,

आज अलग हो गया रंग जाति के पैमानों

पर ,

हम देखते रहे चुपचाप कुछ ना कर सके

खुद जला बैठे हम अपने आशियाने को ।।

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