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“मासूम कर्मवीर”

हिकारत भरी नजरों से ना इनको देखो,

ये बच्चे भी इंसान हैं,

अपनी परिवार के ये नन्हें बालवीर,

रोटी के भगवान हैं,

इममें भी हसरतें हैं की पढ लिख कर,

एक अच्छा इंसान बने,

अपने देश अपने समाज का,

अभिमान बने ।

भूख और गरीबी के सताये हैं ये,

अपने परिवार के रोटी के लिये,

दर दर भटकते हैं ये,

इनके कंधे से लटकता ये गोनी का थैला,

इनकी जरुरत का साधन है थैला,

कचरे के ढेर में तलाशते हैं रोटी,

जिसमें इनके अपनो की,

जीवन की है ज्योति ।

इनके फटे पुराने कपड़े दिखाते हैं आइना,

मानवता के क्रूर चेहरे का ये हैं नमूना,

सरकारें दावा करती हैं मिटायेंगे गरीबी, .

हर बच्चे की शिक्षा हर घर को रोटी, .

की ना अब होगी, कमी भी !

इन मासूमों के चेहरों पर छायी उदासी,

भारत के विकास की यही है झांकी ।

इनके लिये मानवता को जगाओ,

मेरे भाई !

इनमें भी हिन्दुस्तान है ,

ये भविष्य की तरुणाई ।

ये भविष्य की तरुणाई ।।

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