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मैं पर्वत हूं,

मैं विशाल अटल हूं,

मेरी पर्वत चोटियां विशाल,

चारों दिशाओं में फैली हैं,

मेरे ऊपर फैली वस्पतियां मेरी शिराएं हैं,

मेरे वक्षस्थल पर सफेद मोती की तरह

चमकती हिम शिखाएं मेरी हृदय स्पंदन हैं,

मैं पर्वत हूं विशाल हूं,

मैं महादेव का हिमालय हूं,

मैं अटल, अचल, विशाल हूं ।।

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