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“लोकतंत्र”

आज हर तरफ वीरानियां क्यों है ?

शमशान में हलचल क्यों है,

कोई आन्दोलन कारी की अर्थी,

उठ रही है,

मानवता की पुकार ऊँघ रही है,

चारों तरफ तूफान के उठने का,

संकेत, लगता है मुर्दों में

हरकत हो रही है ।

अब तो आवाज उठती भी है

तो सियासत के लिये ,

वरना किसी को फिकर क्यों

हो रही है ।

यह लोकतंत्र कैसा, जिसमें

होठों पर पट्टी लगी है,

जिसमें अवाम बेजान खड़ी

अपने रक्षक को तक रही है ।।

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