लेखनी के शब्द's image
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लेखनी से जब शब्द निकले

जीवन छंद बन जाएं,

अन्याय, अत्याचार के लिए

शमशीर बन जाए,

बगावत की लौ बन जाए

अधिकार की ज्योति,

परिवर्तन की मशाल बनकर

हर हाथों में आ जाए,

चुप रह जाए जो आवाज वो

दमन की पर्याय बनकर,

लेखनी मेरी उस चुप्पी की

चीत्कार बन जाए ।

लेखनी के हर शब्द अवाम की

आवाज बन जाए ।।

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