कर्म का परिणाम's image
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इंसान अपने ही कर्मों से अपनी

पहचान बनाता है,

हमारे कर्म ही हमारे व्यक्तित्व का

परिचायक बनते हैं,

बांस देखा है आप सबने,

उसी बांस को चीर कर तीर बनाकर,

औरों को घायल करने का औजार

बनाया जा सकता है,

और उसी बांस को छीलकर बांसुरी

भी बनाया जाता है,

जिसके स्वर लहरी हमें संगीतमय

सुख का अहसास कराती है ।

अर्थात हम अपने कर्मों का उपयोग

किस उद्देश्य के लिए करते हैं

महत्वपूर्ण यह होता है ।।

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