कारवां's image
Share0 Bookmarks 59 Reads0 Likes

एक वक्त था जब कारवां चलता साथ साथ

आज वक्त बदला और अकेला हो गया,

झूठ और फरेब को खुद में ना ढाल सका,

पीछे मुड़कर जब देखा तो कारवां गुम हो गया ।

जब तलक सूरज की रोशनी

फिजाओं में रोशन रही सृष्टि के हर अंग में

खुशियां चहल पहल बनी रही,

सूरज के अस्त होते ही

अंधेरों की फैली चादर में सृष्टि का कोलाहल

चिर निद्रा में सो गया ।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts