कलयुग's image
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यह कलयुग है भाई गुनाहगार ऐश करते हैं,

ईमानदार दर्द सहते हैं,

जो शराफत से जीना चाहते हैं गुमनाम रहते हैं

जिन्होंने शराफत छोड़ दी वही तो शहंशाह बनते हैं ,

कोई शिकवा नहीं कलयुग के इस गुण का भाई,

कोई तो है जो कलयुग के इस युग में सरनाम है भाई,

वैसे भी कहावत सही है;

रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा,

हंस चुगेगा दाना दुकना कौआ मोती खायेगा ।

कल हम सबने देखा एक आतंकवादी यासीन मलिक

के सजा के समय देश की सारी मीडिया पल पल की

अपडेट दे रही थी, जैसे वह कोई मसीहा हो !

यही है कलयुग की जो मर्डरर, टेरेरिस्ट हैं उनके उनको

देश की मीडिया कितना फुटेज दे रही है ।।

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