जिंदगी की शाम's image
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कौन जाने कब जिंदगी की शाम हो जाए

ये नजारे ये सितारे ये रंगीनियां गुमनाम हो जाएं

चारों तरफ फैली ये बसंती छटा

कल रहे ना रहे,

आंख बंद हो जाए और सब अंधकार हो

जाए ।

ये जिंदगी हर पल पिघलती आइस्क्रीम

की डली,

कौन जाने कब पिघल कर तमाम हो जाए ।

इसलिए जो भी वक्त आज है अपना

उस वक्त को ऐसे जियो कि जिंदगी

गुलजार हो जाए ।।

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