जिंदगी बाजार's image
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अब तो जिंदगी को भी बाजार बना दिया

बिकने के लिए लाइन लगाए बैठे हैं

मोल लगाने वाले भी हजारों हैं

जिंदगी को बाजार बनाए बैठे हैं ।

कोई महंगा कोई सस्ता भी बिक जाता है

अपनी कीमत को मिल जाने पर

बस चंद सिक्कों की खनक के लिए

अपने जमीर को भी बेच देते हैं ।

यूं तो खोने के लिए कुछ बचा ही नहीं

इंसान तो खुद को सामान बना दिया

इस चकाचौंध भरी दुनिया में

खुद को निर्जीव सामान बना दिया ।।

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