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जिद है कि हम पैदल धरती

को नापेंगे,

सियासत नहीं है कोई बस नफरत

को प्यार बांटेंगे,

कहने को लोग मुझको मसखरा

ही कहते हैं,

मैंने भी ठान लिया है भारत को कदमों

से नापेंगे,

अपने वतन की खुशबू को हर राज्य

हर क्षेत्र से एहसास करना है,

जाति धर्म भाषा मजहब को एक करना है,

हमारी रगों में बहता लहू सबका एक रंग है

सियासत की कुरीतियों से बदरंग रंग है

जोड़ेंगे एक सूत्र में अवाम को माला एक है ।।

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