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हे मृत्यु तुम्हारे विष दंत

इंसानों को ही डसते हैं

हंसते खेलते मासूमों को ही

अपने विष दंत चुभोते हैं

तुम निर्मम हो अति कठोर बन

जन जीवन को शापित करते हो

हर पल तुम हादसों का विनाश लीला

रचते हो ।

पल भर में अनगिनत जिंदगियां

निगल कर मुस्काते रहते हो

तुम नश्वर हो इस सुंदर सृष्टि के

तुमसे नफरत हम करते हैं ।

हे मृत्यु तुम्हारे विष दंत

इंसानों को ही डसते हैं ।।

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