गिरेहबान's image
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गिरेहबां तेरा भी दागदार हो कभी सोचा न था

अवाम से इस कदर बेपरवाह हो कभी सोचा न था

तेरे ही नाम से दम भरते हैं दिन रात

तेरे ही उसूलों को करते हैं तार तार

इस मंदिर के पुजारी हैं या लोकतंत्र की लाचारी

अपने ही रसूख की करते हैं मारा मारी

इनके सफेद लिबास बेदाग हैं मगर

इनके चरित्र पर अंगुलियां उठती हैं अक्सर

जनतंत्र के रखवाले हैं सत्ता के हकदार

कैसे उठाएंगे

एक सौ चालीस करोड़ अवाम का भार

शर्मसार करते हैं गिरेहबां भी दागदार

इस लोकतंत्र के मंदिर में भ्रष्टाचार का व्यापार

कभी सोचा न था ।।

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