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गर्दिश में कहां कोई

अपने पास होते हैं,

टूट जाते हैं सारे रिश्ते

जो अपने खास होते हैं ।

गिला उनसे नहीं कोई

जो वक्त के साथ बदलते हैं,

जब ऋतुयें बदलती हैं

मौसम बदलते हैं ।

किसी के मुकद्दर का फैसला,

कहां इंसान करते हैं,

इस अधिकार का इस्तेमाल,

परवरदिगार करते हैं ।

जो कुछ अपने पास है

उसे खास ही समझो,

यही नियत यही प्रारब्ध,

इसे उपहार ही समझो ।।

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