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एक दिन भी काफी है

हालात बदलने के लिए

आशा का दीप जलाए रखो

सांस निकल जाने तक के लिए ।

सूरज निकलता है तो फिजा

रोशन हो जाती है,

फूल पत्ती डाली डाली

प्रकृति मुस्कराती है ।

यह रोशनी भी छिप जाती है

रात के अंधेरे में कुछ पल के लिए,

जब सुबह की लाली फैल जाती है

तो सारी कायनात मुस्कराती है

उस पल के लिए ।।

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