एक चिराग की रोशनी's image
Kavishala DailyPoetry1 min read

एक चिराग की रोशनी

Sahdeo SinghSahdeo Singh January 21, 2023
Share0 Bookmarks 61 Reads1 Likes

एक चिराग की मद्धिम रोशनी

झोपड़ी से छन छन कर आ रही है

उस प्रकाश की मद्धिम रोशनी में

एक अजनबी की छाया बढ़ रही है,

एक बीमार कृष काया की खांसती

धीमी आवाज जैसे पुकार रही है

भूख से तड़पती काया रोटी एक निवाला

के लिए पुकार रही है ।

एक अनजान छाया झोपड़ी के पास

हाथों में एक पोटली थामे दबे पांव झोपड़ी

में प्रवेश कर आंखों में आंसुओं का सैलाब

लिए अपनी बीमार मां को देख रहा है

वो कोई और नहीं उस बीमार मां का

बेटा जो दुनिया के भीड़ में खो गया था

ममता के पाश में बंधा उसके सामने खड़ा

था,

मां अपनी धुंधली आंखों से अपने कलेजे

के टुकड़े को निहारते खुद चिर निद्रा में सो

शायद उसकी सांसे बेटे को देखने के इंतजार

में चल रही थी ।

मां धरती की वो देवी है जिसके हर धड़कन

में संतान का प्यार निहित है ।

अपने मां का सदा आदर करना सबसे बड़ी

भक्ति है ।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts