दंगा's image
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गंगा तेरे देश में क्यों दंगा हो रहा,

तेरे ही आंचल में क्यों लहू बह रहा,

इस देश की गरिमा तार तार हो रही,

नफरत की आंधी हर ओर चल रही,

अपने ही अपने के खून के प्यासे हो गए,

धर्म की तलवार से एक दूजे कट रहे,

नफरत और तिजारत में देश जल रहा,

सियासत की चौखट पर अवाम पीस रहा,

प्यार जिन दिलों में हर वक्त था मचलता,

आज उन सबके दिलों में अलाव जल रहा ।।

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