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Kavishala DailyPoetry1 min read

चलते चलते चला जा रहा

Sahdeo SinghSahdeo Singh January 24, 2023
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चलते चलते चला जा रहा हूं

राह भटका हुआ मैं कहां जा रहा हूं

कोई मंजिल नहीं कोई साथी नहीं

एक अनजाने डगर पर बढ़ा जा रहा हूं

चलते चलते चला जा रहा हूं ।

यह लंबा सफर कभी कटता नहीं

मैं चलता रहा मगर घटता नहीं

यह जीवन रेखा इतनी लंबी नहीं

अपनी मंजिल की कोई झलक

दिखती नहीं

यह मृगतृष्णा है जिस पर बढ़ा जा रहा हूं

चलते चलते चला जा रहा हूं ।

कोई मकसद जीवन का समझा नहीं

क्यों जिंदा हूं क्या मेरा जीवन सफर

यह रुकेगा कहां किसी को नहीं खबर

एक माया के छाया में डूबा का रहा हूं

चलते चलते चला जा रहा हूं ।

राह भटका हुआ कहां जा रहा हूं ।।

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