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Kavishala DailyPoetry1 min read

भावनाओं का समंदर

Sahdeo SinghSahdeo Singh January 20, 2023
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भावनाओं के इस समंदर में यूं कदर ना बह जाओ

अपनी शख्सियत की रहनुमाई भूल जाओ,

इंसान की पहचान इंसानियत है भाई

कहां मजहब के तकरार में उलझे हो भाई ।

जो ढोंग हर रोज दिखता है मीडिया में

वो हकीकत नहीं सियासत की जरूरत

इसी के आसरे तो सत्ता की कुर्सी करिश्माई ।।

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